CTET 2023 हिंदी भाषा-I हल प्रश्न पत्र: इंटरैक्टिव क्विज़ | Hindi Pedagogy Quiz
CTET 2023 हल प्रश्न पत्र: भाषा I - हिंदी (Paper I, Set A)
परिचय
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यह पोस्ट **केन्द्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) 2023** के प्रश्न पत्र **(पेपर I, सेट A)** में से **भाग IV: भाषा I (हिंदी)** के सभी 30 प्रश्नों पर आधारित एक इंटरैक्टिव क्विज़ है। इसमें गद्यांश, पद्यांश और शिक्षण शास्त्र (Pedagogy) के प्रश्न शामिल हैं, जो आपको परीक्षा के पैटर्न को समझने में मदद करेंगे।
क्विज़: CTET भाषा I - हिंदी (प्रश्न 91-120)
व्याख्या: यह कथन भाषा के प्रयोग की सटीकता पर स्वयं ध्यान केंद्रित करने की प्रक्रिया को दर्शाता है, जिसे स्व-निरीक्षण (Self-monitoring) कहते हैं।
व्याख्या: समग्र भौतिक प्रतिक्रिया (TPR) एक भाषा शिक्षण विधि है जिसमें छात्र शारीरिक क्रियाओं के माध्यम से निर्देशों का जवाब देते हैं। यहाँ बच्चे अंग का नाम सुनकर उसे स्पर्श कर रहे हैं।
व्याख्या: जब विद्यार्थी एक-दूसरे के काम का मूल्यांकन करते हैं या एक-दूसरे से प्रश्न पूछते हैं, तो यह सहपाठी आकलन (Peer assessment) का उदाहरण है।
व्याख्या: अभिनय करना एक गति-बोधक (kinesthetic) गतिविधि है। यह टिप्पणी दर्शाती है कि शिक्षार्थी शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से बेहतर सीखता है।
अभिकथन (A): विद्यालय में प्रवेश करने वाले सभी बच्चे अपनी आयु अनुसार भाषा के सक्षम प्रयोगकर्ता होते हैं।
तर्क (R): भाषिक और सांस्कृतिक विविधता के कारण वे अपनी योग्यताओं का प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं।
व्याख्या: बच्चे स्कूल आने से पहले ही अपनी मातृभाषा के सक्षम प्रयोगकर्ता होते हैं (A सही है)। भाषिक और सांस्कृतिक विविधता उनकी योग्यताओं के प्रदर्शन में बाधा नहीं बनती, बल्कि एक संसाधन होती है (R गलत है)।
व्याख्या: विभिन्न सामाजिक संदर्भों में भाषा का उचित रूप से उपयोग करने की क्षमता को उपयोगितावाद या प्राग्मेटिक्स (Pragmatics) कहा जाता है।
व्याख्या: व्यवहारवाद का सिद्धांत यह मानता है कि भाषा अनुकरण (imitation) और पुनर्बलन (reinforcement) के माध्यम से सीखी जाती है। माँ का विश्वास इसी सिद्धांत से मेल खाता है।
व्याख्या: औपचारिक पठन सीखने से पहले बच्चों द्वारा विकसित किए गए कौशल, जैसे किताब पकड़ना, चित्र देखकर कहानी का अनुमान लगाना आदि, उद्गामी साक्षरता कहलाते हैं।
व्याख्या: संभाषिक पठन में वयस्क और बच्चे के बीच किताब पढ़ते समय संवाद होता है, जिसमें प्रश्न पूछना, चर्चा करना और सक्रिय भागीदारी शामिल है।
व्याख्या: बॉटम-अप उपागम में पठन-पाठन की शुरुआत छोटे घटकों (जैसे वर्ण, ध्वनि) से होती है और फिर शब्द, वाक्य और पूरे पाठ की ओर बढ़ा जाता है।
अभिकथन (A): ध्वन्यात्मक वर्तनी के प्रयोग से सही वर्तनी लिखना सीखने की योग्यता मंद पड़ जाती है।
तर्क (R): जब बच्चे पारंपरिक वर्तनी के स्थान पर अपनी 'आविष्कृत' वर्तनी का उपयोग करते हैं, तब यह सही वर्तनी लिखने की उनकी योग्यता को मंद नहीं करती है।
व्याख्या: बच्चों द्वारा आविष्कृत वर्तनी का उपयोग करना सीखने की प्रक्रिया का एक स्वाभाविक हिस्सा है और यह उनकी सीखने की क्षमता को धीमा नहीं करता है (R सही है)। इसलिए यह कहना कि इससे योग्यता मंद पड़ती है, गलत है (A गलत है)।
व्याख्या: खेल-आधारित और मौखिक अंतःक्रिया वाली गतिविधियाँ एक सुरक्षित और मजेदार वातावरण प्रदान करती हैं, जिससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे बिना झिझक के भाषा का प्रयोग करते हैं।
व्याख्या: संदर्भ (context) में शब्दावली सिखाना सबसे प्रभावशाली तरीका है। जब बच्चे किसी स्थिति या कहानी के संदर्भ में नए शब्द सीखते हैं, तो वे उसका अर्थ बेहतर ढंग से समझते और याद रखते हैं।
व्याख्या: भाषा सीखना एक कौशल (skill) है, जिसमें सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना शामिल है, और इसे अभ्यास के माध्यम से विकसित किया जाता है।
a. अनुमान लगाना i. अपरिचित शब्दों को समझने के लिए पाठ्य सामग्री के कुछ हिस्सों से मदद लेनी चाहिए।
b. निष्कर्ष निकालना ii. पाठ्य-वस्तु किस बारे में है यह जानने के लिए शीर्षक और चित्रों का प्रयोग करना।
c. संदर्भ से जोड़कर अर्थ निकालना iii. लेखक कैसे लिखते हैं, इसके आधार पर यह तय करना कि क्या लिखा गया है।
d. गहन पठन iv. सूचना की संरचना कैसे की गई है, यह समझने के लिए।
e. पाठ्य-वस्तु के संयोजन की पहचान v. भाषा कैसे प्रयुक्त की गई है इस पर ध्यान केंद्रित करना।
व्याख्या: सही मिलान है: अनुमान लगाना (a-ii) - शीर्षक/चित्रों का प्रयोग, निष्कर्ष निकालना (b-iii) - लेखक के आधार पर तय करना, संदर्भ से अर्थ निकालना (c-i) - अपरिचित शब्दों को समझना, गहन पठन (d-v) - भाषा के प्रयोग पर ध्यान, संयोजन की पहचान (e-iv) - संरचना समझना।
गद्यांश (प्रश्न 106 से 114)
"अपने स्वार्थ या संस्कृति के कारण सामान्य व्यवहार में हम कितनी ही बार सबसे धन्यवाद बोलते हैं। तो यह कृतज्ञता सिर्फ़ उन्हीं तक सीमित क्यों? हमें मानव जन्म देने वाले ईश्वर के लिए और जलवायु, भोजन, ऊर्जा जैसे बहुत सारे उपहार देने वाली प्रकृति के लिए भी क्यों नहीं? हम ईश्वर से संवाद करें कि वह हमारे हृदय में पवित्रता, सद्गुणों के प्रकाश को आलोकित करें। दुखों के कारण तो हमारे विकार हैं, बुराइयाँ हैं। हर बुराई अज्ञान के अंधकार में फैलती है, प्रकाश होते ही उसका सामर्थ्य खत्म हो जाता है। सुख-दुख दोनों ही हमारे कर्मों के फल हैं। हमें समझना चाहिए कि बिना दुख भोगे, सुख नहीं पाया जा सकता है। मानवीय पुरुषार्थ करते रहें, मन की कोठरी को स्वच्छ रखें, जहाँ ज़रूरत हो, प्रायश्चित भी अवश्य करें। कौन जाने कब किस रूप में प्रभु किस माध्यम से सहायक हो जाएँ। ईश्वर के प्रति आभार प्रकट करना एक ऐसा अचूक तरीका है जो हमें असंतुष्टि और ईर्ष्या जैसी निकृष्ट बातों से ऊपर उठाता है और यही हमारे जीवन का मूलभूत लक्ष्य है।"
व्याख्या: गद्यांश के अनुसार, ईश्वर के प्रति आभार प्रकट करना हमें असंतुष्टि और ईर्ष्या से ऊपर उठाता है, जो जीवन का मूलभूत लक्ष्य है।
व्याख्या: मूल शब्द 'मानव' में 'ईय' प्रत्यय लगने से 'मानवीय' बनता है।
व्याख्या: 'अंधकार-अँधेरा' समानार्थी शब्द-युग्म है, जबकि अन्य सभी विलोमार्थी (विपरीतार्थक) हैं।
काव्यांश (प्रश्न 115 से 120)
आया समय, उठो तुम नारी,
युग-निर्माण तुम्हें करना है।
आज़ादी की खुदी नींव में,
तुम्हें प्रगति पत्थर भरना है।
अपने को कमज़ोर न समझो,
जननी हो संपूर्ण जगत की, गौरव हो।
व्याख्या: कविता में स्त्री को 'आज़ादी की खुदी नींव में प्रगति पत्थर भरने' का आह्वान किया गया है, जो एक महत्वपूर्ण और संज्ञान योग्य भूमिका है।
व्याख्या: कविता में 'कमज़ोर न समझो' कहकर अबला न होने का संकेत है, लेकिन 'अबला' शब्द का सीधा प्रयोग नहीं हुआ है। सबला का भाव है, नींव और गौरव का उल्लेख है।
व्याख्या: 'अपने को कमज़ोर न समझो' पंक्ति का भाव यही है कि स्त्री को अपनी शक्ति को पहचानना चाहिए।
व्याख्या: पंक्ति में 'ज' वर्ण की आवृत्ति ('जननी', 'जगत') के कारण अनुप्रास अलंकार है।
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भाषा शिक्षण से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: CTET में भाषा I और भाषा II में क्या अंतर है?
भाषा I का कठिनाई स्तर भाषा II की तुलना में थोड़ा अधिक होता है। भाषा I में प्रश्न साहित्य और भाषा की गहरी समझ पर केंद्रित होते हैं, जबकि भाषा II में भाषा की बुनियादी समझ और संप्रेषण कौशल पर अधिक जोर दिया जाता है।
प्रश्न 2: भाषा पेडागॉजी के लिए कौन से टॉपिक्स महत्वपूर्ण हैं?
भाषा पेडागॉजी के लिए भाषा अधिग्रहण और सीखना, भाषा शिक्षण के सिद्धांत, श्रवण और वाचन की भूमिका, भाषा कौशल (सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना), मूल्यांकन, और उपचारात्मक शिक्षण जैसे टॉपिक्स बहुत महत्वपूर्ण हैं।
निष्कर्ष
हमें उम्मीद है कि CTET 2023 के भाषा I (हिंदी) खंड का यह हल प्रश्न पत्र आपकी तैयारी में उपयोगी साबित होगा। भाषा खंड में अच्छा स्कोर करने के लिए गद्यांश और पद्यांश का अभ्यास करना और पेडागॉजी की अवधारणाओं को समझना बहुत महत्वपूर्ण है।
आपकी सफलता की कामनाओं के साथ,
M S WORLD - The World of HOPE 😊
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